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जब भूखी जनता ने राजा का सिर कलम कर दिया 😱 | फ्रांसीसी क्रांति

by fierceotter638299 viewsHindi1:0435d ago

जब भूखी जनता ने राजा का सिर कलम कर दिया 😱 | फ्रांसीसी क्रांति

सन् 1789 में फ्रांस की आम जनता भारी टैक्स और भूख से तड़प रही थी — जबकि राजा लुई सोलहवाँ महल में ऐशो-आराम से जी रहा था। समाज इतना असमान था कि सारा बोझ सिर्फ गरीबों पर था। 14 जुलाई 1789 को जनता ने बास्तील किले पर धावा बोला और इतिहास बदल गया। "स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व" का नारा गूँजा और मनुष्य के मौलिक अधिकारों की घोषणा हुई। 1793 में राजा को गिलोटिन पर फाँसी दी गई, फिर आतंक का राज आया — और उस अराजकता से नेपोलियन का उदय हुआ। जो अधिकार आज हम सहज मानते हैं, वो एक भूखी जनता ने खून से छीने थे।

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जब एक पूरी जनता ने अपने राजा से कहा — बस, अब नहीं! सन् 1789 में फ्रांस की आम जनता भूखी थी, भारी टैक्स से दबी थी। जैसे स्कूल में कुछ बच्चों को मुफ्त खाना मिले और बाकी को ज़्यादा पैसे देने पड़ें — फ्रांस में बिल्कुल यही हो रहा था। समाज तीन वर्गों में बँटा था — पादरी, कुलीन, और बाकी सारी जनता। सबसे ज़्यादा बोझ आम लोगों पर, और राजा लुई सोलहवाँ महल में ऐशो-आराम से। 14 जुलाई 1789 को जनता ने बास्तील किले पर धावा बोला — राजशाही के अत्याचार का प्रतीक। क्रांतिकारियों ने नारा दिया — स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व — और मनुष्य के अधिकारों की घोषणा जारी की। 1793 में राजा लुई को गिलोटिन पर फाँसी दी गई। फिर आतंक के राज में रोबेस्पियर जैसे नेताओं ने हज़ारों निर्दोषों को मरवाया। इस अराजकता से नेपोलियन उभरा और यूरोप बदल गया। वो अधिकार जो आज हम सहज मानते हैं — एक भूखी, थकी जनता ने उन्हें खून से छीना था।

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